शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

बुधवार, 10 जून 2015

944-kshanikaaye

kshanikaaye

1-वार्तालाप
तुम ही मेरा सुर हो
तुम ही हो मेरा आलाप
मन ही मन तुमसे
करता रहता हूँ
मैं निरंतर वार्तालाप

२- स्मृति
मेरे मन के भीतर
बहती है
स्मृति की एक अंतहीन नदी
जिसके जल दर्पण में
उभर आयी है
तुम्हारी सुन्दर छवि

३-परवाह
नदी पर्वत हो या राह
सभी करते हैं
मेरी तरह तेरी परवाह

४-कथा
मेरी व्यथा
बन गयी एक अमर कथा

५-दर्द
दर्द बहुत है सीने में
तुमसे बिछड़ कर
मज़ा नहीं आ रहा जीने में

६-उल्फत
रहे उल्फत में आता है
एक न एक दिन वह मोड़
अलग अलग हो जाते है रास्ते
चल पड़ते है फिर हम
विपरीत दिशा की ओर

७-खत
आज भी तुम्हारा
नहीं आया खत
कह रहा दरवाज़ा
इंतज़ार करना
छोड़ना मत

८-वीरान
तुमसे कुछ कह पाना
अब आसान कहाँ है
तुम बिन लगता
वीरान यह जहां है

९-अक्फर
अक्फर हूँ तो क्या हुआ
अकीब रहा हूँ
मैं तेरा अक्सर

अक्फर =बड़ा नास्तिक ,अकीब =अनुगामी
१०-शुक्रिया
बरकरार ए हौसला अफजाई
के लिए शुक्रिया
तुमने तो मुझे
अपना दिल दे दिया

११-चितवन
तेरी मस्त निगाहों के हैं हम कायल
तेरी चितवन ने किया है हमें घायल

१२- असर
तेरे सिवा मुझे
कुछ आता नहीं नज़र
मोहब्बत का आँखों पर
इतना ज्यादा होता है असर

किशोर कुमार खोरेन्द्र

943-तेरा ख्याल मुझे...

तेरा ख्याल मुझे...
तेरा ख्याल मुझे ,तराश रहा है
मेरे ह्रदय में ,तेरा निवास रहा है

परछाई बिना नहीं रह सकता जल
तेरा साया सदा मेरे आसपास रहा है

बून्द में सागर का ख़्वाब तो होगा ही
तेरा ,मुझे वैसा ही ,अहसास रहा है

मालूम नहीं कितने बार जन्मा हूँ मैं
तबसे मेरा वजूद ,तुझे तलाश रहा है

दर्दे तन्हाई का कारवां साथ है मेरे
तुझपे ,मुझे अटूट विशवास रहा है

किशोर कुमार खोरेन्द्र

शनिवार, 23 मई 2015

942-kshanikaayen

kshanikaayen
1-तुम लौ हो मैं हूँ बाती
एक दीया प्यार का
यूँ ही सदा जलता रहे
२-दिन
किसी न किसी दिन तो
तुम अपने दिल की बात मुझसे कहोगे
उस दिन के इंतज़ार में जिए जा रहा हूँ
३-ख़ामोशी
तेरी ख़ामोशी के सहारे ही जी लेंगे
यह सोच कर की तुमने
बहुत कुछ मन ही मन
मुझसे कहा होगा
४-बेवज़ह
इस जहां में ऐसी है कोई जगह
जहाँ पर हम दोनों मिले बेवज़ह
५-फर्क
तुझमे और मुझमे बस है फर्क इतना
तुम मुझे भूल जाते हो
मैं तुम्हारी यादो के जल से
भरा रहता हूँ सागर जितना
६-लफ्ज़
मेरे शब्द तेरे ही तो लफ्ज़ होते हैं
अक्षरों में तेरी बोलती आँखे
तेरे मुस्कुराते लब
उपलब्ध होते हैं
७-पत्थर
दिल तोड़ना न तुझे आता है न मुझे
हर मोड़ पर इसलिए मील की जगह
लम्बी इंतज़ार के पत्थर होते है
८-परिचय
शब्दों के द्वारा होता है
जब एक दूसरे से परिचय
भींग जाता है तब
स्निग्ध स्नेह से ह्रदय
९-गुरुर
तुम्हें अपने हुस्न पर है गुरुर
मेरे इश्क़ में भी पर है शुरुर
kishor kumar khorendra

942-जबसे तेरे मेरे दरम्यां.....

जबसे तेरे मेरे दरम्यां.....
जबसे तेरे मेरे दरम्यां और फ़ासिला बढ़ गया
तबसे तुझसे मिलने के लिए हौसला बढ़ गया
मेरे लिये तेरे बगैर जीना अब आसान नहीं है
रहे तन्हाई में मेरे दर्द का काफिला बढ़ गया
जुदा न कर पायेगा सारा जहां तुझे मुझसे
मन में प्यार का अटूट सिलसिला बढ़ गया
एक चिंगारी सी उड़ी जब आँखें टकरायी
शोलों की लपटों से घिरा हूँ मामला बढ़ गया
किशोर कुमार खोरेन्द्र

941-.प्यार के बदले में....

प्यार के बदले में....
प्यार के बदले में नहीं कुछ पाना चाहता हूँ
दूर से ही सही तेरा रूप निहारना चाहता हूँ
वो घडी भी आ गयी की तुझे अब जाना है
तेरी पलकों के भीतर छुप जाना चाहता हूँ
यादों की भी एक अलग सी दुनियाँ होती है
वहीँ पर मैं सदा के लिए रुक जाना चाहता हूँ
तेरी मोहब्बत के सिवाय पास मेरे क्या है
सरे राह तेरे कदमों तले लुट जाना चाहता हूँ
रोज रोज लिखता रहूँगा तुझे मैं प्रेम के खत
तेरी रूह से इस तरह मैं जुड़ जाना चाहता हूँ
किशोर कुमार खोरेन्द्र
सरे राह =राह में चलते हुऐ

940-मुझसे किसी बात पर....

मुझसे किसी बात पर....
मुझसे किसी बात पर तू नाराज़ न हो
नदी सी साथ चल मुझसे नासाज़ न हो
यूँ तो हर समय तुझे मैं याद रखता हूँ
मेरे किसी व्यवहार से तू नाशाद न हो
तेरी इबादत करता रहूंगा मैं आजीवन
मेरी नियत मेरे इरादे कभी नापाक न हो
मैं सदा से तुम पर मुग्ध हूँ निसार हूँ
मेरी पूजा मेरी उपासना नाकाम न हो
तेरी निगाहों को पढता रहूँ सुनता रहूँ
एक दूसरे से अलग हो ऐसे हालात न हो
किशोर कुमार खोरेन्द्र
{नासाज =प्रतिकूल ,नाशाद =अप्रसन्न ,इबादत =उपासना
नापाक =अपवित्र ,निसार =कुर्बान ,नाकाम=असफल
हालात =दशा }