शनिवार, 2 मई 2015

928-"क्षणिकायें"

"क्षणिकायें"


१-
ख्याल
बीत गए सालो साल
गया नहीं मन से
तेरा ख्याल
२- रूप
छाँव हो या धूप
हर जगह दिखलाई
देता है मुझे
तेरा ही रूप
३-करीब
नहीं रहेगा जब यह शरीर
तब भी तुम रहोगे
मेरे मन के करीब
४-रास्ता
मंजिल नहीं थी ज्यादा दूर
तभी अचानक
उनका रास्ता गया मुड
५-चित्र
मेरा चित्र आते ही
वे आगे बढ़ जाते हैं
जैसे मुझे जानते ही न हो
ऐसा जतलाते हैं
६-अंत
बातचीत है बंद
दोस्ती का लेकिन
नहीं हुआ अंत
किशोर कुमार खोरेन्द्र

2 टिप्‍पणियां:

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

बहुत बढ़िया क्षणिकाएं