शनिवार, 23 मई 2015

942-kshanikaayen

kshanikaayen
1-तुम लौ हो मैं हूँ बाती
एक दीया प्यार का
यूँ ही सदा जलता रहे
२-दिन
किसी न किसी दिन तो
तुम अपने दिल की बात मुझसे कहोगे
उस दिन के इंतज़ार में जिए जा रहा हूँ
३-ख़ामोशी
तेरी ख़ामोशी के सहारे ही जी लेंगे
यह सोच कर की तुमने
बहुत कुछ मन ही मन
मुझसे कहा होगा
४-बेवज़ह
इस जहां में ऐसी है कोई जगह
जहाँ पर हम दोनों मिले बेवज़ह
५-फर्क
तुझमे और मुझमे बस है फर्क इतना
तुम मुझे भूल जाते हो
मैं तुम्हारी यादो के जल से
भरा रहता हूँ सागर जितना
६-लफ्ज़
मेरे शब्द तेरे ही तो लफ्ज़ होते हैं
अक्षरों में तेरी बोलती आँखे
तेरे मुस्कुराते लब
उपलब्ध होते हैं
७-पत्थर
दिल तोड़ना न तुझे आता है न मुझे
हर मोड़ पर इसलिए मील की जगह
लम्बी इंतज़ार के पत्थर होते है
८-परिचय
शब्दों के द्वारा होता है
जब एक दूसरे से परिचय
भींग जाता है तब
स्निग्ध स्नेह से ह्रदय
९-गुरुर
तुम्हें अपने हुस्न पर है गुरुर
मेरे इश्क़ में भी पर है शुरुर
kishor kumar khorendra

1 टिप्पणी:

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं