शनिवार, 23 मई 2015

940-मुझसे किसी बात पर....

मुझसे किसी बात पर....
मुझसे किसी बात पर तू नाराज़ न हो
नदी सी साथ चल मुझसे नासाज़ न हो
यूँ तो हर समय तुझे मैं याद रखता हूँ
मेरे किसी व्यवहार से तू नाशाद न हो
तेरी इबादत करता रहूंगा मैं आजीवन
मेरी नियत मेरे इरादे कभी नापाक न हो
मैं सदा से तुम पर मुग्ध हूँ निसार हूँ
मेरी पूजा मेरी उपासना नाकाम न हो
तेरी निगाहों को पढता रहूँ सुनता रहूँ
एक दूसरे से अलग हो ऐसे हालात न हो
किशोर कुमार खोरेन्द्र
{नासाज =प्रतिकूल ,नाशाद =अप्रसन्न ,इबादत =उपासना
नापाक =अपवित्र ,निसार =कुर्बान ,नाकाम=असफल
हालात =दशा }

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