शनिवार, 23 मई 2015

939-क्षणिकायें

क्षणिकायें
१-निशाने पर
उसी शहर उसी गली उसी मोड़ उसी ठिकाने पर हूँ मैं
तेरी घायल कर देने वाली निगाहों के निशाने पर हूँ मैं

२-हुस्न
तेरे प्यार की ख़ुश्बू से महकने लगा हूँ
तेरे हुस्न की आंच से दहकने लगा हूँ

३-तन्हाई
नहीं है तेरे सिवा मेरा कोई
तू ही तो है मेरी तन्हाई

४-इज़हार
तुम करो न करो मुझसे प्यार
मैं तो
करता रहूँगा प्रेम का इजहार

५-कश्ती
साहिल तक पहुँच पायी कश्ती
लगा जैसे
मंझधार में वो कर रही हो मस्ती

६-परवाह
तेरे मन में
मेरे प्रति भले न हो चाह
पर मैं तो हर पल
करता हूँ तेरी परवाह

७-अपमान
जब तक तेरे इश्क़ में
मैं न होऊं बदनाम
तब तक
इश्क़ का होगा अपमान

८-
मैं चाहता हूँ
रोज तुझसे मिलना
तेरे मन उपवन में
हर दिन फूलों सा खिलना

९-संग मेरे
संग मेरे
अतीत के संयोग के हैं पल
और
भविष्य के वियोग के हैं पल

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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