शनिवार, 23 मई 2015

936-kshanikaayen

kshanikaayen
१-सागर
मैं सागर हूँ
तुम हो भरा हुआ मय
कहूँ तो
यही सच हय
(सागर =प्याला )

२-कविता
जब तक तुम हो
तब तक मैं हूँ
और
तब तक है कविता

३-प्रेम
जीवन खत्म हो जाता है
प्रेम नहीं

४-खत
संभाल कर रखा हूँ सारे खत
पढ़ लिया करता हूँ जब जब
सूना होता है जीवन का पथ

५-प्रभाव
जब हो जाता है किसी से लगाव
तब उसकी ख़ामोशी का
मन पर
कुछ ज्यादा ही पड़ता है प्रभाव
अनुत्तरित सवाल की तरह
आ जाता है समय में ठहराव

६-आशिक़
तुझ पर कितना भी लिखूं वो कम है
तेरे सच्चे आशिक तो हम हैं

७- पत्तें
उनके पास पढने के लिए समय नहीं है
फिर भी हम लिखते रहते हैं
उनके मौन के आँगन में
पत्तों सा
टप टप झरते रहते हैं

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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