रविवार, 3 मई 2015

931-क्षणिकायें...

क्षणिकायें...
१-प्यार की कहानी
रूबरू मिलना होता नहीं ज़रूरी
बिना मिले ही
प्यार की कहानी हो जाती है पूरी

२-व्यथा
पढ़ते रहे एक दूसरी की कथा
पर
एक जैसी होती है सबकी व्यथा

३-अश्क़
तेरी आँखों से भी मेरे लिए कभी कभी आंसूं बहते होंगे
यह सोचकर मेरे अश्क भी तेरे दर्द को और सहते होंगें

४-याद
तेरी यादों के सहारे ये जिंदगी गुजर जायेगी
तेरी तस्वीर जब तब आँखों में उभर आयेगी

५-दीदार
उनकी दृष्टि से हम
गुनाह कर बैठे
बिना पूछे उनसे हम
चुपके से
उनकी तस्वीर का
दीदार कर बैठे

6-फासला
बहुत फासला तय करना पड़ा मुझे
जीत कर तेरा दिल
रस्मों रिवाज के हाथो
तुझे ......
हारना पड़ा मुझे

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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