रविवार, 3 मई 2015

930-अंजाम ....

अंजाम ....

अब पूछूंगा नहीं तुमसे
किस रंग के है तुम्हारे परिधान
आँखों में अश्रु है तेरे
या अधरों पर मधुर मुस्कान
न खत होंगे
प्रेम अभिव्यक्ति के प्रमाण
न मेरे सपने करेंगें अपनी दुनियाँ में
तुम्हारा आव्हान
अब मेरे ख्याल तुम्हारे ख्यालों को
कर देंगे दरकिनार
तुम्हारी जुल्फों के ख़म में
न उलझा करेंगे मेरे विचार
वो पुल ,वो नदी ,वो किनारे
वो नीम का वृक्ष
नहीं करेंगें संग मेरे
तुम्हारा इंतज़ार
अब तेरी ख़ामोशी से मेरी ख़ामोशी की होगी
तन्हाई में सिर्फ
औपचारिक जान पहचान
मुझसे मुंह फेर लेने का
यही तो होगा न अंजाम
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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