गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

927-क्षणिकायें..

क्षणिकायें..
१-
"कौन सोचता है"

तेरे प्यार में जीने लगा हूँ
जान देने की
कौन सोचता है
तेरे प्यार की झील में
तैरने लगा हूँ
डूबने की कौन सोचता है
२-
"उन्हें"

उन्हें आता नहीं है
प्यार जताना
आता है तो
चुप रह कर
सिर्फ तड़फ़ाना

३-
'मुलाकात"

हर मुलाकात को
आखरी मान कर
मिला करो
क्योंकि जिंदगी का
कोई भरोसा नहीं होता
४-
"पैगाम"

कई दिन कई माह कई बरस
बीतने के बाद
आई है वो शाम
जिसके लिए बरसो पहले
दिया था मैंने
उन्हें पैगाम
५-
"लब"

खामोश रहते है तेरे लब
समझ लेता हूँ मैं
उनकी ख़ामोशी का मतलब
६-
खबर

अब तेरी निगाहों में
मैं आने लगा हूँ नज़र
पर तुझे इस बात की
जरा सी भी नहीं है खबर
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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