बुधवार, 22 अप्रैल 2015

918-क्षणिकायें...

क्षणिकायें...
1-खुशी
रास्ते में मिले पेड़ नदी और सागर
लेकिन
खुश हुआ एक दिन मैं तुम्हें पाकर
2-रास्ता
मेरा सिर्फ
तुझसे है वास्ता
तेरी और ही जाता है
मेरा हर रास्ता

3-हीरा
तेरे नूर से
रहता हूँ सदा घिरा
मैं सोना हूँ तू है हीरा

4- "फेसबुक
आपके आते ही आ जाती है जान
फेसबुक लगने लगता है महान

5-सरसार
देख कर जमाले यार
हो गया हूँ मैं तो सरसार
उन्हें इस बात की खबर नहीं है
क्या पता हो जाता उन्हें ऐतराज
{सरसार =मस्त
जमाले यार =महबूब का हुस्न }
6- करीब
बोलती है उनकी आँखें
मिलो कभी करीब आके
7- तन्हाई
तुम्हारे बगैर मैं अब ऊब जाता हूँ
तन्हाई के सागर में डूब जाता हूँ

8- चुप
क्या अब चुप रहना है
कुछ नहीं कहना है
9-जुगनू
रात के अंधेरों में
जुगनू सा चमकते हो
मैं तुम्हें नहीं भूला हूँ
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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