शनिवार, 11 अप्रैल 2015

911-तुम इतने पास.......

तुम इतने पास.......
तुम इतने पास से गुजर गये
नज़ाकत से तेरी हम सिहर गये

महक तेरी सांसों में समा गयी
हम उन्हीं पलों में अब ठहर गये

तुम्हें इल्म ही नहीं की क्या हुआ
चाहत में तेरी हद से गुजर गये

बुलाये नहीं तुम मुझे अपने घर
फिर भी हम तो तेरे शहर गये

वियोग का दर्द तुम क्या जानो
हिज्र का हम पी कटु जहर गये

किशोर कुमार खोरेन्द्र
(najaakat =sukumaartaa ,sihar =kaampna, ilm =jaankaari ,hijr =judaaii }

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