मंगलवार, 27 जनवरी 2015

896-पसंद मुझे तेरी तस्वीर..

पसंद मुझे तेरी तस्वीर..
पसंद मुझे तेरी तस्वीर ,तुझे मेरी तहरीर आ गए
आते आते इतने करीब हमारी रूहों के शरीर आ गए

रस्ता न मंजिल ,साहिल न कारवां ने साथ दिया
हमें मिलाने हमारे सौभाग्य के लकीर आ गए

आकाश और जमीं जहाँ पर मिलते हैं वहाँ से कहने
अपनी दुनियाँ बसा लो क्षितिज से समीर आ गए
झील में चाँद और चांदनी सा हमें इतराते देख कर
हया का चिलमन बनने लुके छुपे तिमिर आ गए
जहाँ की तीखी नज़रों से भला कौन बच पाया है
ख्वाबों ख्याल को जीने के हमें तरकीब आ गए
किशोर कुमार खोरेन्द्र
(तहरीर =लेखन ,साहिल =किनारा ,समीर =पवन , चिलमन=पर्दा
तिमिर =अँधेरा ,तरकीब =तरीका )

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