बुधवार, 14 जनवरी 2015

885-हममे ऐसी....

हममे ऐसी....

हममे ऐसी सोहबत हो जाए 
की दोनों में क़ुरबत हो जाए

एक दूसरे में तलाशे खुद को 
दोनों की ऐसी हसरत हो जाए

जर्रे जर्रे में बस तू ही नजर आये 
निगाहों की ऐसी फितरत हो जाए

मन ही मन जो कहूँ तू सुन ले
खुदा से ऐसी इनायत हो जाए

मुझे भी तुम याद करते रहो
तेरी मुझ पर रहमत हो जाये

किशोर कुमार खोरेन्द्र

{सोहबत =संगत ,क़ुरबत =निकटता ,फितरत= आदत,
इनायत =कृपा ,रहमत =कृपा }

2 टिप्‍पणियां:

इंतज़ार ने कहा…

वाह सुबहे सुबहे ...उनकी याद करादी आपने ...बढ़िया

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

intazar ji shukriya