गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

877-सड़क पुल पेड़

सड़क पुल पेड़ , नदी सभी खोये से हैं
कोहरे मे अभी नज़ारे सभी सोये से है
किरणों सी मुझे तलाशती आ जाओं
तन्हाई से घिरे हम भी घबराये से हैं

जर्रा जर्रा खामोशी से लिपटा हुआ है
निरुत्तर इस जहाँ में हम पराये से हैं
तेरा मेरा रिश्ता ख़त्म न होगा कभी
तेरा पीछा करते आये हम साये से हैं
किशोर कुमार खोरेंद्र

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