गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

876-दिल तोड़ने के

दिल तोड़ने के आजकल कई बहाने होते हैं
मोहब्बत करने वाले आजकल सयाने होते हैं
तोहफे में जख्मे जिगर देना अदा ए हुश्न है
दिले बेकरार लिए हम जैसे दीवाने होते हैं
ख्वाबों ख्याल में साये सा तुम्हें रख लिया हूँ
अनलिखे से भी इस जहाँ में अफ़साने होते हैं
निसारे यार तक मुहब्बत करने का इरादा है
कयामत तक वादा ए उलफत निभाने होते हैं
हम तो चूर रहेंगें तेरे प्रेम के नशे में ता उम्र
दिखाने के लिए हम जैसे खाली पैमाने होते हैं
किशोर कुमार खोरेंद्र
(जख्मे जिगर=प्रेम का जख्म ,दिले बेकरार=आहत हृदय ,अफ़साने=किस्से ,कयामत=प्रलय
वादा ए उलफत=प्यार का वचन ,पैमाने= शराब का गिलास )

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