गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

874-दिल की बात

दिल की बात कह पाना उतना आसान नहीं है
बस तुझे मैं चाहूँ मेरा और कोई अरमान नहीं है
कहकशाँ सी मेरी आँखों में तुम समा गए हो
मुकद्दर में मेरे क्या तुझसा आसमान नहीं है
मुझ पर भी इनायत कर दो तो जानूं तुम्हें ऐ खुदा
कहते हैं जहाँ में तुझसा कोई मिहरबान नहीं है
दुनियाँ में सबसे प्यार करूँ कि तेरे लिये फ़ना हो जाऊँ
क्या तेरे नूर से लबरेज हर जर्रा प्रत्येक इंसान नहीं है
न कोई आईना न रास्ता ,न कोई मंजिल न हमसफ़र
सवाल है तन्हाई से ,क्या मेरी कोई पहचान नहीं है
किशोर कुमार खोरेन्द्र
{अरमान =लालसा ,कहकशाँ =आकाश गंगा ,इनायत =कृपा ,मिहरबान =दयावान ,फना =नष्ट ,लबरेज =परिपूर्ण ,जर्रा =कण }

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