शनिवार, 29 नवंबर 2014

860-यादों में तुम्हारे ....

यादों में तुम्हारे ....

यादों में तुम्हारे हरदम मैं खोया रहता हूँ 
तेरे सपनो के आगोश में मैं सोया रहता हूँ

तुम कोहरे सा आकर रोज ओझल हो जाते हो 
वियोग सूत्र में अश्रु मोतियों सा पिरोया रहता हूँ

शबनम से नम रहती हैं फूलों की आँखों सी पंखुरियाँ 
हृदय सरोवर में कमल बीज सा तुम्हें बोया रहता हूँ

पतझड़ के अमावाश के तम सा एकाकी रहता हूँ
तुम्हारी स्मृति को ज्योत्सना सा संजोया रहता हूँ

मेरे प्रेम का तुम्हें अहसास होगा कभी न कभी
तेरे प्रति निरंतर चराग़ ए इश्क़ जलाया रहता हूँ

किशोर कुमार खोरेंद्र

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