मंगलवार, 11 नवंबर 2014

853-"खत "

"खत "

क्या मेरे दिल में ही बस प्यार प्यार भरा है 
लोग कहते है हमारा दिल भी सोने सा खरा है

शब्दों ने मेरी उंगली पकड़ कर मुझसे लिखवाया 
वरना मेरी ज़ुबाँ पर भी तो जड़े ताले का पहरा है

वो भोली है नादां हैं दुनियानदरी से वो दूर है 
मेरे प्रति उसके हृदय का प्रेम पर बहुत गहरा है

रोज लिखने को कहता है मन उसे प्रेम के खत 
साथ मेरे खजाँ का हर कोंपल हो गया हरा है

जिस शै को देखता हूँ उसमे तुम ही नज़र आते हो 
जैसे बहार को ताकता हर तरफ परेशान सहरा है

किशोर कुमार खोरेंद्र

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