रविवार, 26 अक्तूबर 2014

835-"इज़हार"

"इज़हार"

सचमुच में हूँ तुझपे मैं निसार 
निभा नहीं रहा हूँ कोई किरदार

ख्वाबों में तुम हो ख्यालों में तुम ही हो 
तुमसे प्यार करने का हैं मुझे अधिकार

यूँ तो ये जिंदगी तन्हा भी बीत जाती 
साथ होकर किया हैं तूने मुझ पर उपकार

तुम्हारे मन में अजल से रहता आया हूँ
सिर्फ़ नहीं हूँ मैं एक तसव्वुर खुशगुवार

आरंभ से तेरी ही जुस्तुज़ू थी तेरी ही आरजू थी
जहाँ में उस मोब्बत का कर रहा हूँ तुमसे इज़हार

किशोर कुमार खोरेंद्र

{निसार =मुग्ध ,क़ुर्बान , किरदार =पात्र ,अजल =आदि ,तसव्वुर=ध्यान ,विचार ,
खुशगुवार = मनोवांछित,रुचिकार ,जुस्तुज़ू=तलाश ,आरजू=कामना , इज़हार =प्रगट करना }

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