रविवार, 26 अक्तूबर 2014

829-"सुरूर "

"सुरूर "

तेरी आँखों में हैं सुरूर 
तुझे प्यार हुआ है ज़रूर 

तेरी पलके खुलती है तो सूरज उगता है 
मेरी राहो में बिछा है नूर ही नूर 

तेरी खामोशी में बेहद असर हैं 
मेरे ग़ज़ल हो रहे हैं मशहूर 

तू साए की तरह मेरे साथ है
मुझे अपनी तन्हाई पर है गुरूर

तू कोहरे सा आकर चली जाती है
मेरे पास तेरे वजूद का नहीं है कोई सुबूत

मै जी रहा हूँ एक तसव्वुर को
लोग कहते हैं इसे इश्क़ का जुनून

किशोर कुमार खोरेंद्र

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