रविवार, 26 अक्तूबर 2014

826-प्रेम कहानी "

"प्रेम कहानी "

मेरी मोहब्बत और तेरी पशेमानी
ग़ज़ल के पीछे है यही एक कहानी

जग वालों मुझ पर यूँ न हंसा करों 
तुम्हारी आँखों में भी भरा हैं खारा पानी

आख़िर पहुँच ही जाती है सागर तक नदी 
कहाँ से आती है उसमे पुरजोश रवानी

मिल ही जाती हैं कभी न कभी नज़रों से नज़रें
जल उठता है तब भीतर एक चिराग रूहानी

तुझे मालूम नहीं की मैं ही हूँ तेरा दीवाना
मुझे मालूम नहीं की तू ही है मेरी दीवानी

बयाँ किसी ने नहीं किया आज तक ,बस
किताबों में पढ़ते हैं मनगढ़न्त प्रेम कहानी

किशोर कुमार खोरेंद्र

{पशेमानी=संकोच,लज़्ज़ा}

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