सोमवार, 14 जुलाई 2014

786-do tuuk

do tuuk 




"प्रथम "

दूर रह कर भी 

जब 

लगे कोई पास

यही तो हैं

इश्क़ का

प्रथम अहसास

२-

"फ़िदा "

बनाये बिना

कोई भूमिका

मैं कह

रहा हूँ सीधा

तुम पर

हूँ फ़िदा

३-

"फ़ना "

कुछ कहना हैं

यहाँ मना

चुप रह कर भी

आजीवन

इश्क़ में

कुछ लोग हो

जाते हैं फ़ना

४-

"बातें "

न जाने कितनी सारी

बातें हैं जिसे

मैं चाहता हूँ

उसे बताना

पर चली जाती हैं

मानती कहाँ हैं

वह मेरा कहना

५-

"प्रतिउत्तर "

न जाने

कितनी बार हूँ

तुम्हें पुकारा

पर प्रतिउत्तर में

न तुमने हां कहा

न नकारा

६-

"आषाढ़ "

आया आषाढ़

मन की नदी में

लेकर

तुम्हारी यादो

की बाढ़



"चाह "

मैं तुम्हें

चाहूँ कितना

सागर में भरा हो

पानी जितना

८-

"समंदर "

प्यार में डूबने के लिए

चाहिए मुझे

जो समंदर

वह हैं

तुम्हारी निगाहों

के अंदर

९-

"भला "

मैं जो भी हूँ

बुरा या भला

अब तो

तेरा हो चला

१०

"मंजिल "

तुमसे मिलने के लिए

मैं रहता हूँ तरसता

अब तो

तुम्ही हो

मेरी मंज़िल और

मेरा रस्ता

किशोर कुमार खोरेन्द्र