सोमवार, 14 जुलाई 2014

779-"दो टूक "

"दो टूक "

1-
न अक्षर न शब्द न आवाज़ 
कैसे लगाऊं 
गहन प्रेम का मैं अंदाज़ 

2-
सुन रहा हूँ 
तुम्हारे मन का संगीत 
इसीलिए लिख रहा हूँ गीत

३-
कहो तो कर दूँ
तुम पर जान कुर्बान
मत लेना मेरे प्रेम का
तुम इम्तहान

4-मालूम नहीं
उनका पता न ठिकाना
फिर भी लोग कहते है
मैं हूँ उनका दिवाना

5 -
तुममे हैं कस्तूरी सी गंध
इसीलिए तो नहीं हो रहा हैं
तुम्हारे प्रति मोहभंग

6-
बिना अनुबंध के भी
होता है सम्बन्ध
जीते है सिर्फ
तुम्हारी यादो के संग

7-
उसके ख्यालों में
मैं रहता हूँ
खुशनसीब खुद को
मैं कहता हूँ

8-
वो मुझे
करदेते है नज़र अंदाज़
अपनापन जताने का
यह भी है
उनका एक अँदाज़

9-
कब और कहाँ
होगी उनसे मुलाक़ात
यह नहीं हैं तय
मैं उनका इंतज़ार
करता रहता हूँ
हर समय

10-
बिना बोले
रोज हो जाती है उनसे बात
प्यार में अक्सर
ऐसे ही
कटती है हर रात

11-
किसी ने आज तक नहीं पूछा
न किया कोई सवाल
फिर भी न जाने क्यों
मैं लिखता रहता हूँ
कोरे पन्नों पर जवाब

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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