रविवार, 26 जनवरी 2014

756-"मनोकामना "

"मनोकामना "

 
देश के प्रति
मन में हैं भक्ति
संकट आये तो
अपने तिरंगें के खातिर
हम देंगें
अपने प्राणों की आहुति
गंगा सी पावन हैं
हमारी संस्कृति
एक माले में पिरोये गए हैं
अनेक रंग अनेक धर्म अनेक जाति
हिमालय सी सुदृढ़ है
हमारी एकता के लिए सहमति
प्रजा के द्वारा प्रजा के लिए
हैं हमारे राष्ट्र की राजनीति
न कोई भूखा रहे न कोई रोगी
मिले सभी को
कपड़ा मकान और रोटी
इस मनोकामना को पूरा करने के लिए
हे भारत माँ.
हमें दो शक्ति

किशोर कुमार खोरेन्द्र