बुधवार, 22 जनवरी 2014

753-"दो टूक"

"दो टूक"

1-क्या तुम्हें मुझसे
दोस्ती करके हो रहा हैं अफ़सोस
समझ में नहीं आया
तुम्हारे मन में
मेरे प्रति क्यों हैं आक्रोश
मैं तो अक्सर ही रहा हूँ मौन
पर कविताओं में तुम्हें
शब्दों की तरह
लिखता रहा हूँ जोड़ जोड़

2-अजनबी हो या परिचित
बोले कम पर
चेहरे से लगे की
मैं उनसे मिलकर


हूँ प्रसन्नचित

3-मीलूँ कैसे तुमसे
बिना वज़ह बिना बात
पर मुस्कुराते हैं दोनों के नयना
जब भी होती हैं मुलाक़ात

4-ख़तम न हो कभी
तुम्हारा इंतज़ार
वियोग में ही
महसूस होता हैं प्यार

5-नींद में हो तुम
एक मधुर सपन
तुम्हारे मीठे ख्यालों से युक्त हैं
मेरा जागरण

6-तुम्हें मालूम भी हैं या नहीं
तुम्हें हम भूलते कभी नहीं

7-तुम मुझसे पूछती हो
की
मैं इतना कैसे लेता हूँ सोच
तुम्हें पता नहीं
तुम्हें याद करते करते
मैं तो खो चुका हूँ अपना होश

8-मन में तुम
इस तरह से गए हो बस
रूह के ओंठों ने जैसे
चख लिया हो मधु रस

9-मिलते हैं जब भी
दो व्यक्ति
उनमे एक दूसरे के
व्यैक्तित्व के प्रति
हो ही जाती हैं आसक्ति

10-तुम शमा हो
मैं हूँ परवाना
चाहता हूँ तुम्हारे
इश्क़ में मैं जल जाना

11-चाहूँ या न चाहूँ
तुम्हारी स्मृति के
उन्मुक्त जंगल में
मेरे नाम से रोज एक फूल खिलता हैं
पंखुरियां महकती ही हैं
उसकी खुश्बू को
उसके सौंदर्य को
मैं अपनी आँखों को बंद करके
महसूस कर लिया करता हूँ

12-दाल रोटी चांवल
मिल जाए
तब अच्छा लगता हैं
चाँद और चांदनी की स्निग्ध किरणों से
झिलमिलाता
लहरों का आँचल

13-मुझे याद करने के लिए
उन्हें दिलाना पड़ता हैं याद

14-रोज लिखो स्टेटस
तभी तो होगे फेमस

15-इस दुनियाँ की
दोस्ती होती हैं कच्ची
फेसबुक के जहाँ की
होती हैं दोस्ती पक्की

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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