शनिवार, 18 जनवरी 2014

752-दो टूक

दो टूक



१-
सागर में पहुँचकर
जैसे नदी
उसमे जाती हैं घुल
वैसे ही
मैं तुम्हे पाकर
खुद को गया हूँ भूल

२-

प्रेम में
मिलन की अवधि होती हैं क्षणिक
विरह काल होता हैं अत्यधिक

3-

न कम न ज्यादा
पर
ज़रूर निभाओ
दोस्तों से वादा

4-t

तुम्हारी ख़ामोशी को ही तो
पढ़कर लिखता हूँ
तुम्हीं से तो कविता लिखना
रोज सिखता हूँ

5-
तुम्हारी उपस्थिति का
जब होता हैं अहसास
मन करता हैं
पहुँच जाऊँ उड़कर
तुम्हारे पास

6-
रिश्ते को आखिर तक
निभाना तुम्हारे लिए
न जाने क्यों था कठिन
मुझे तो साँस लेने में भी
तकलीफ हो रही हैं तुम बिन

7-
जिनका मैं नहीं जानता
सही नाम और पता
उनसे भी हो जाती हैं
फेसबुक में न जाने क्यों
गहरी मित्रता

8-
ज़रूरी नहीं हैं यह
की
सभी मुझे करे पसंद
मेरे शब्द मेरे भाव
कुछ लोगो के मन को ही
दे सकते हैं आनंद

9-

दोस्त ही तो
बनता हैं दुश्मन
जुड़ने में नहीं लगता वक्त
अलग अलग होते होते
व्यतीत हो जाता हैं पूरा जीवन

kishor kumar khorendra