बुधवार, 15 जनवरी 2014

735-"ह्रदय के गमले में"

"ह्रदय के गमले में"

 

कभी सूरज की तरह दिन भर
कभी चाँद की तरह रात भर
तुम्हें तलाशता ही रहता हूँ
तुम ठंडी हवा के एक
झोंकें की तरह आती हो
तुम कुछ देर के लिए
खुश्बू सी सांसों में
समा जाती हो
तुम बादलों के झरोखों से
उड़ते हुए नीले आकाश के पतंग की तरह
अपनी एक झलक दिखला जाती हो

तुम्हारे और मेरे बीच
कांच हैं
कांच के विस्तृत फलक के भीतर तुम हो
तुम्हारे और मेरे मध्य
सपनो का कोहरा हैं
कोहरे के अंदर तुम छिपी हुई हो

काश तुम्हारी रूह को मैं
अपने ह्रदय के गमले में रोप पाता

तुम्हारी जड़ों को
अपने भीतर फैलते हुए महसूस कर पाता

किशोर

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