शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

728-"एक ग्राणीण युवती "

"एक ग्राणीण युवती "

नटखट मन चंचल चितवन
सुडौल तन सुन्दर आनन
निर्मल ह्रदय हँसीं ऐसी
जैसे
खिला हो अभी अभी सुमन
कुंतल लंबे और सघन
हो जब आगमन
नीरस lage न वातावरण
आप से आप
मुस्कुराने लगे यौवन

तीखे नाक नक्श
बोलती मीठे वचन
चहरे पर हैं
ग्रामीण भोलापन
जब देखो तब कार्य रत
मिले न उसे फुर्सत

जानती समझती सब हैं
लेकिन अभिनय किये बिना
जीती हैं
संयमित
अनुशासित
मर्यादित
और स्वाभाविक जीवन
किशोर

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