शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

723-आप

आप

अगर मिल जाती 

आपकी कोई खबर
आसान हो जाता 

मेरे जीवन का सफ़र

आप ही से दिल की बात
करने का था इरादा
पर कोई काम ज़रूरी हो गया
इस वक्त
हमारी बातों से ज्यादा

आप तो मेरी हर बात से हैं वाकिफ़
आपके बारे में कुछ जान पाऊँ
यह मेरे लिए कहां हैं मुनासिब

कोई बात नहीं होती तब भी
आप हो जाते हो नाराज़
प्यार प्रदर्शित करने का
यह भी खूब हैं अंदाज

किशोर कुमार खोरेन्द्र

{मुनासिब =उचित
वाकिफ़ =परिचित
अंदाज़ =ढंग }

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