बुधवार, 27 नवंबर 2013

"तुम्हारा ख्याल"



chhoti rachnaaye 

1-pyaar hain sirf madhur smran .
.maine bhi to kiya hai ...
isi tarah se apni smriti me ...
tumhe varan ..



2-baaton ki shrinkhala ki
shesh rah jaati hain kadi
isi bhahaane
mil liya karenge fir kabhi


3-main hi hu apne man ka jaankaar ...
ki vah bechain ho ..
kaese karta hai kisi ka intazaar .



4--"तुम्हारा ख्याल"

आते ही
तुम्हारा मन में ख्याल
हल हो जाते हैं सारे सवाल
शब्दों के समूह एकजुट हो जाते हैं
अभियक्त होने लगता हैं
आपसे आप दिल का हाल
आते ही
तुम्हारा मन में ख्याल

5-"अनाम रिश्ता"
अदृश्य सी महीन होती हैं
अनाम रिश्ते की डोर
न समझना उसे पर
नाजुक और कमजोर
निश्छल होता हैं
यह सम्बंध
न कोई जोर
न कहीं कोई शोर



6-तुम्हारी आँखें
मेरे लिए वो आईना हैं
जिनमें मुझे
मेरी देह नहीं ,मेरा मन नहीं
मेरी रूह दिखाई देती हैं


7-jaese nadi ke sath
rahataa hain kagaar
usi tarah se hain
mera tumase karaar
maine kiya tha tumase
apne pyaar ka izhaar
badale me tumne kaha tha
main nadiya hun
chalte raho mere sang
mere bahaav ke anusaar


8-तुम
वो एक मधुर गीत हो
जिसे मैं
मन ही मन
इस तरह से गाता रहता हूँ
इस तरह से गुनगुनाता रहता हूँ
ताकि कोई सुन न सके
या
तुम
तुम्हारे द्वारा प्रेषित
वह प्यार भरा अंतिम ख़त हो
जिसके शब्दों को
मैंने
अपने ह्रदय के कोरे पृष्ट पर
अमिट रूप से लिख लिया हैं


9-karate rahe unke aagman ka intazaar
pal pal lagata raha sadiyon sa


10-jinke ghar ki divaare khamoshi ke iiton se bani ho ..

unhe kaese pukaaraa jaaye ..


11-mai to tumhare khatir
rachata hi rahta hun chhand
tarif karate rahane ka
tumne hi toda hain anubandh


12

-"अहसास "
तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा
आता हैं मुझे नज़र
तुम्हारी खिलखिलाहट का
मुझ पर दिन भर रहता हैं असर
अपनी निगाहों से आने के लिए
इशारे किये हो तुम मुझे जिधर
मन करता हैं
चलता रहूँ बस उधर
हालाकिं तुम उपस्थित नहीं हो
पर तुम्हारे होने का
अहसास लिए किया करता हूँ सफ़र
तुम्हारे जूड़े में
गुलाब की पंखुरोयों सा
खिला हुआ हूँ मैं
जिसे सहेजती हो बार बार तुम छूकर
मैं तुम्हारा दुप्पटा हूँ
जो तुम्हारे कंधें से सरकता भी हैं
तो संभल कर

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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