सोमवार, 18 नवंबर 2013

714-"मेरे खयाल से "

"मेरे खयाल से "

मेरे लिए तुम
चुटकी भर नमक हो
मेरे जीवन में स्वाद आ गया हैं
मेरे लिए तुम
चम्मच भर शक्कर हो
मेरी दिनचर्या में मिठास आ गया हैं
लेकिन मेरे खयाल से
वियोग में
तुम्हारी आँखों से
छलक आयी अश्रु बूंदें
नमक से अधिक नमकीन होती हैं


मुझे देखते ही
तुम्हारे ओंठों पर
उभर आयी मुस्कराहट
शक्कर से ज्यादा मीठी होती हैं

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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