रविवार, 3 नवंबर 2013

710-माहिया

माहिया

सुखद मलय शीतल हैं
भ्रमण सुबह भाये
सुमन महक विलय हुआ

सपना हैं या माया
नज़र परख लेगें
तू छू मत यह छाया

अच्छी होगी नीयत
धोखा मत देना
उसकी हैं कीमत

छल बल से पाया जय
सत पथ पर चलना
समझों इसका आशय

किशोर

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