शनिवार, 2 नवंबर 2013

708-"एक नन्ही चिड़िया"

"एक नन्ही चिड़िया"

 

यह कैसा है महावृत्त
जो है अपरिमित
जिसमें व्यास है न त्रिज्या
उसे छूना जितना चाहूँ
उसकी परिधि भी लगती है
तब क्षितिज सी मिथ्या
बिना केंद्र बिंदु के
किस प्रकार से -
खींची है किसने
बिना आकार की
यह गोलमाल  दुनियाँ
न ओर का पता, न छोर का
फिर भी -
आकाश को भी
अपने परों से नाप रही है
हर मन के घोसलें  से .उड़कर
एक नन्ही चिड़िया
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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