शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

707-mahiya

मेरा मन तेरा घर
रहना आजीवन
चिंता ना कोई डर


रखना सच से वास्ता
जीतो या हारो
जग में पालो रास्ता



एक अच्छा हो पाठक
छन्दों की रचना
बनता लेखक साधक



लौटा कर दो बचपन
हो मनचाहा सब
होने ना दूँ अनबन



kishor