रविवार, 13 अक्तूबर 2013

699-"सौन्दर्य "

"सौन्दर्य "

फूल जब तक रहा खिला

सुगंध उससे मुझे मिला

रंग में उसके दिन भर

मन मेरा उलझा रहा

मोहित कर गयी मुझे

उसकी कोमल पंखुरिया 



कभी

गुनगुनाता हुआ आता

हैं मधुप

कभी

कलियों कों

चूम लेती हैं तितलिया

प्यार उनका निहारने

फुनगी पर

चुपचाप बैठी हैं

देखो एक ढीट चिड़िया

पवन के झोंकों के विरुद्ध

संघर्ष करता हुआ

यह पुष्प ,वृंत पर

दृढ़ता से हैं रहा टिका

ठीक साँझ होने से पहेले

जड़ों के करीब

क्षत विक्षत मुझे वह दिखा

न फूल ,न उसकी पंखुरिया

न वे मधूप ,न वे तितलिया

न वह धूप ,न वह चिड़िया

जान पाए कि...

कयों एकाएक

अश्रुपूरित हो गयी हैं

सौन्दर्य पर मुग्ध थी

जो ..मेरी अँखियाँ



किशोर

4 टिप्‍पणियां:

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना मुझे बहुत अच्छी लगी .........
बुधवार 16/10/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
में आपकी प्रतीक्षा करूँगी.... आइएगा न....
धन्यवाद!

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

yashoda agrwal ji bahut shukriya avm aabhaar
avashy upasthit hounga

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर !
latest post महिषासुर बध (भाग २ )

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

kali prasad ji shukriya