रविवार, 6 अक्तूबर 2013

695-07-10-1954 से 07-10-2013 तक

07-10-1954  से   07-10-2013 तक 



















आज मेरा ५९ वाँ  जन्म दिवस हैं 
आरम्भ के छ: वर्षों  का ज्ञान नहीं हैं 
पहली से पांचवीं  तक भिलाई छत्तीसगढ़ में पढ़ा 
छठवीं से ग्यारहवीं तक रायपुर  छ्ग़.  में पढ़ा 
बी ए pratham  से अंतिम तक रायपुर में पढ़ा 

१४साल तक पढाई करने के पश्चात पत्रकारिता ,टायपिंग 
की कक्षा में गया एक वर्ष तक 
फिर बैंक की परीक्षा की तैयारी किया 

18-10 -77 से मैं प्रतिस्पर्धा में  उतीर्ण होकर  भारतीय स्टेट बैंक में 
कैशियर बन गया 
18-10-84 से फिर मेरी पदोन्नति  हुई और मैं अधिकारी बन गया 

दल्ली राजहरा ,बालकों ,सक्ती ,बरमकेला ,बलौदा बाजार ,नवापारा राजिम ,
ताड़ोकी ,अंतागढ़ ,बागबाहरा। .इत्यादि शाखाओं में  पदस्थ रहा 

ब्रांच मैनेजर रहते हुए मैं  18-04-2006 में बैंक से वी आर एस लेकर सेवा निवृत हुआ 

तब  से अपने जीवन की महत्वपूर्ण अभिलाषा याने काव्य सृजन में रत हूँ 

किताबें पढ़ने का भी मुझे शौक हैं 

वर्तमान में पिता जी का देहांत  पिछले साल हुआ ,माँ हैं ,पत्नी हैं ,दो बेटे हैं एक पुत्री हैं 
एक दामाद हैं ,एक नाती हैं ,सास ससुर हैं 

raipur  में रहता हूँ ,मुंगेली में मेरा गाँव हैं वहां अक्सर जाया करता हूँ ,माँ  वही  रहती हैं 

उनकी उम्र पच्यासी साल की हैं 




मेरी धर्म पत्नी शिव की पुजारन हैं ,वह विदुषी हैं ,वह मुक्त आत्मा हैं ,
मेरे घर के आँगन में शिव जी का मंदिर हैं 



नेट पर मेरा प्रवेश अक्टूबर दो हज़ार आठ से हुआ हैं तभी से  यह ब्लॉग बनाया हैं 

आरकूट से फिर मैं फेसबुक तक पहुंचा ,इस बीच बहुत से मित्रों का प्रोत्साहन मुझे 
मेरे लेखन के लिए मिला 

मेरे लिए प्रक्रति ,ईश्वर ,कल्पना  =तीनों का मतलब एक ही हैं 
इन्हें अपनी कविताओं में एक साथ प्रस्तुत कर मैं चैतन्य हो उठता हूँ 

बचपन से मैं प्राय: अकेला ही रहता आ रहा हूँ ,किताबे मेरे दोस्त रहे हैं 
धरती में 
वृक्ष ,नदियाँ ,पर्वत 
और 
आकाश में 
तारों के समूह ,चाँद ,सूरज 
मुझे बहुत प्रिय हैं 

देह से ,मन से परे 
स्वयं को मैं एक चेतन के रूप में इस कायनात में उपस्थित पाता  हूँ 
मैं आस्तिक हूँ 
मैं अंतर्मुखी हूँ 
मैं अत्यंत संवेदनशील हूँ 

रंग बिरंगें बादलों से आच्छादित नभ ,सुबह का समुद्रीय तट ,
सागौन ,साल ,के वृक्षों से भरे वन ,पर्वतों की ऊँची चोटीयाँ 
पगडंडियाँ ,घाटी की or  चढ़ती हुई घुमावदार सड़कें ,
मुझे लिखने की प्रेरणा देते हैं 
मैं विरह की अपेक्षा मिलन के सौन्दर्य का उपासक हूँ 



किशोर कुमार खोरेन्द्र 
रायपुर 
सात अक्टूबर दो हजार तेरह 

5 टिप्‍पणियां:

vibha rani Shrivastava ने कहा…

सुख, शान्ति एवं समृद्धि की शुभ मंगलकामनाओँ के साथ जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

shukriya vibha shrivastav ji

इमरान अंसारी ने कहा…

अति सुन्दर एक आम आदमी की कहानी …....बहुत अच्छा लगा आपके बारे में जानकार |

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

shukriya imran ansaari ji

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

imran ansaari ji main aapke charo blog se add ho gaya hun