गुरुवार, 3 अक्तूबर 2013

693-"वजूद"

"वजूद"

मैं कायदा हूँ या तू रिवाज हैं
मेरे मन में यहीं कशमकश हैं

तुम हो तो मेरा वजूद हैं
साथ मेरे ,तेरा अक्स हैं 


प्यार करना गुनाह नहीं हैं
प्रतिबंध मगर सख्त हैं

यूँ तो मुझे कोई गम नहीं हैं 
मेरी आँखों में फिर भी अश्क हैं

आबे रवा सा तेरा हुश्न हैं
आबे सियाह सा मेरा इश्क हैं

किशोर कुमार खोरेन्द्र

{आबे रवा =बहता पानी
आबे सियाह =गहरा पानी }
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