गुरुवार, 29 अगस्त 2013

672-"तुम्हारे बारे में विचार"

"तुम्हारे बारे में विचार" 

तुम केंद्र बिंदु  हो 
मैं हूँ हिसार 

मैं एक कोरा  पन्ना  हूँ 
तुम हो पूरी किताब 

तुम नींव हो 
मैं हूँ दीवार 

मैं तीरगी हूँ 
तुम हो चिराग 

तुम मंदिर का स्वर्ण कलश हो 
मैं हूँ जर्जर  मीनार 

मैं रिवाज हूँ 
तुम हो उसके खिलाफ 

तुम पाक रूह हो 
मैं हूँ मलीन लिबास 

मुझमे बाकी हैं अब तक विकार 
अपने मन पर है तुम्हारा 
सम्पूर्ण अधिकार 

तुम सोच से परे हो 
मैं किया करता हूँ 
फिर भी 
तुम्हारे बारे में विचार 

तुम हिजाब हो 
रहता हैं फिर भी 
मुझे तुम्हारा  इंतिजार 

मैं  किया करता हूँ  
तुम्हारी इबादत 
तुम हो 
खूबसूरत निगार 


मैं कभी कभी 
तुम्हारी परवाह नहीं करता हूँ 
तब भी तुम 
मुझ पर हो निसार 

तुम केंद्र बिंदु  हो 
मैं हूँ हिसार 


किशोर कुमार खोरेन्द्र 

{हिसार =परिधि ,तीरगी =अंधकार ,रिवाज =परंपरा ,हिजाब =संकोच,  निगार =प्रतिमा निसार =न्योछावर ,}

2 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
अभिव्यक्ति......

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

bahut shukriyaa sushma varmaa ji