मंगलवार, 18 जून 2013

647-"तुम सुषमा हो मनोहर"

"तुम सुषमा हो मनोहर"

दहक उठा हैं तुम्हारे वियोग मे
मेरी तन्हाई का सूना जंगल
तुम्हे प्रत्यक्ष देखा भी हूँ या नहीं
स्मरण नहीं हैं
आदि काल से
व्यतीत हो चुके हैं
अब तक बरस अनंत
तुम सुषमा हो मनोहर
तुम सुनहरी धूप सी
या
शीतल चांदनी सी लौट आओ
होगा जब तुम्हारा पदार्पण
करेंगे मेरे हृदय के उमंग
पुष्पों से तुम्हारा अभिनन्दन
तुम्हारे आगमन की
कर रहा हूँ चिर काल से प्रतीक्षा
यही हैं तुम्हारे प्रति
मेरे विहल प्रेम की परीक्षा
खिले खिले से लगते हैं सरोवर मे
प्रणय पंकज
फिर भी खोया नहीं हैं मेरा मन संयम
दहक उठा हैं तुम्हारे वियोग मे
मेरी तन्हाई का सूना जंगल
किशोर

9 टिप्‍पणियां:

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह.......बहुत खुबसूरत........

yashoda agrawal ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 29/06/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुंदर भाव एवं अभिव्यक्ति ....
शुभकामनायें ...

Kuldeep Thakur ने कहा…

सुंदर एवम् भावपूर्ण रचना...


मैं ऐसा गीत बनाना चाहता हूं...




Neeraj Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (01.07.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी. कृपया पधारें .

shorya Malik ने कहा…

बहुत सुंदर, यहाँ भी पधारे ,

http://shoryamalik.blogspot.in/

Swati Vallabha Raj ने कहा…

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ ....बधाई ....

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

imran ansari ji ,yashoda agraval ji ,anupma tripathi ji ,kuldeep thakur ji ..shukriya

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

neeraj ji ,shorya malik ji ,swati ji ..shukriya