मंगलवार, 18 जून 2013

646-अज़ल से क़ियामत तक

अज़ल से क़ियामत तक
क़ियामत से इब्दिता तक
इश्क़े हकीकी हैं
या
इश्के मजाज़ी हैं
इसलिए
यह दुनियाँ हुश्नआराई हैं ..

किशोर

{अज़ल =अनादी कल से ,क़ियामत =प्रलय ,इब्दिता=आरम्भ
इश्क़े हकीकी =इश्वर भक्ति ,इश्के मजाज़ी=मानवीय प्रेम
हुश्नआराई=सुन्दर होना }

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