रविवार, 24 मार्च 2013

627-देख कर तुम्हारी तस्वीर

देख कर तुम्हारी तस्वीर
लिखता हूँ कवितायें फिर
पर कभी
कह नहीं पाता पूरी बाते
मन रह जाता हैं

आखिर तक अधीर
जानता हूँ इस जन्म में
तुमसे मिलन असम्भव हैं
क्या सदियों से सह रहा हूँ
मैं वियोग की यही असह्य पीर
क्या यही बहुत बड़ी घटना नहीं हैं
की
हम दोनों के मन आ गए हैं
एक दूसरे के करीब
इंसान से प्यार करने वाला मनुष्य ही
ईश्वर के लिए प्रेम गीत
लिख पायेगा एक दिन
देख कर तुम्हारी तस्वीर
लिखता हूँ कवितायें फिर

किशोर कुमार खोरेन्द्र

14 टिप्‍पणियां:

sakhi with feelings ने कहा…

man ke anokh se khyaal se sazi kavita

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

Kailash Sharma ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

sakhi ji shukriya

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

kailash ji shukriya

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

sakhi ji shukriya

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

मन के भावों की लेखनी

होली की शुभकामनाएँ

expression ने कहा…

बहुत सुन्दर और सहज कविता.....

सादर
अनु

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

anju ji shukriya

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

expresion ji shukriya

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

मन के कुछ पीर यूँ ही साथ जीते. सुन्दर कविता.

सतीश सक्सेना ने कहा…

शुभकामनायें आपको !

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

jenny sis shukriya

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

satish sakxena ji dhnyvaad