रविवार, 24 मार्च 2013

623-"आज ...अनायास "

"आज ...अनायास "

शर्म से मुख तुम्हारा हो गया लाल
मन करता है तुम्हारे गालों से
चुरा लूँ ....मुट्ठी भर गुलाल

तुम्हारी आँखों के इशारों को
मैं समझ न पाया
जीवन भर रहा
इस बात का मुझे मलाल

खेतों में फिर
खिल आया हैं
प्यार का गाड़ा रंग लिए पलाश
महक उठी है अमराई
मुझे भी तुम्हारी याद आई हैं
आज ...अनायास

किशोर

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