गुरुवार, 3 जनवरी 2013

"603-साक्षी हैं इतिहास"



"साक्षी हैं इतिहास"

साक्षी हैं इतिहास
पाकर मां का आशीर्वाद
अवतरित हुए
धरती पर भगवान्
उस नारी का कर अपमान
किस तरह से
सुसंस्कृत हो पायेगा इंसान

अब तक चुप रहकर
देते आये सुधरने का
असंयम को अवसर
जागरूक हो चुकी है महिलायें
अब न सहेंगी वे
सदियों से होते आये
इस तरह के अपराध

तजना होगा आज के परिवेश में
छेड़ छाड़ ,छींटाकसी ,यौन उत्पीडन
दहेज प्रथा ,भ्रूण हत्या और बलात्कार
करना होगा नारी प्रताड़ना से जुडी
हर घटना पर दंड का
सख्त से सख्त प्रावधान

नारी देवी का हैं रूप
ममता की हैं मूरत
श्रद्धा की हैं वह पात्र
नारी के कारण ही पुरुष का
अस्तित्व हैं विद्यमान

सहनशीलता का यह अर्थ नहीं की
भविष्य में भी हो
उन पर होता रहे घोर अत्याचार
पुरुषों पहचानों भारत माता को
अब न हो
इस पावन धरती पर
ऐसे निंदनीय हालात

निस्वार्थ प्रेम की बाती सी जो
प्रज्वलित रहती हैं आजीवन
उसी के कारण सूर्य में है प्रकाश
पाकर मां का आशीर्वाद
अवतरित हुए
धरती पर भगवान्
साक्षी हैं इतिहास


किशोर कुमार खोरेन्द्र

2 टिप्‍पणियां: