बुधवार, 12 दिसंबर 2012

आखरी कविता का सबको इंतजार है




आखरी कविता का सबको इंतजार है 




किसी कवि  की कविता  को पढ़कर तृप्त होना कविता  है ,..कविता  न लिख पाऊं पर कलम लेकर बैठ  जाऊं ,और कोरे पृष्ट को देखता रहूँ ,.यह भी एक कविता है /.

कविता शब्दों में ,कवि  में या किताबो में ...बंद नही है ,कविता तो सम्पूर्णत:... आदमी के भीतर है ,समय से उसका अनुबंध है ,आखरी कविता का सबको इंतजार है 
{कवि  किशोर कुमार खोरेन्द्र,,रायपुर,छत्तीसगढ़}

कोई टिप्पणी नहीं: