रविवार, 2 दिसंबर 2012

बस जलता रहूंगा मैं ...

बस जलता रहूंगा मैं ...

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, June 5, 2010 at 3:15pm ·
बस जलता रहूँ
मैं बन
तुम्हारे इन्तजार का एक दीया

मेरी भावनाओं के
उज्जवल अक्षरों से अंकित
कविताओं कों -
तुमने पढ़कर ....
कभी न जिया

तुम्हारे मौन की लपटों की आंच में -
मेरा जीवन मोम सा पिघलता रहा
जिसे -
मैंने तुम्हारे चरणों में हैं ...
अर्पित किया

कह सकती हो तुम -
मुझे ..यह समर्पण नहीं हैं ......
स्वीकार
लेकिन तुम्ही बताओ
मेरी इस छोटी सी
पवित्र कामना के बदले में
तुम तक पहुचने के सारे दरवाजों कों -
तुमने बंद कयों कर लिया

अब
बस जलता रहूंगा मैं ...
बन तुम्हारे इन्तजार का ..
एक दीया
किशोर

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