शनिवार, 8 दिसंबर 2012

96-वादियों में तुम्ही हो



96-वादियों में तुम्ही हो

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, July 30, 2011 at 9:02am ·



आ जाओ फिर एक बार
अधरों पर
मिश्री सी-
लिये हुए मुस्कान
 तुम्हें निहारने कों आतूर
मेरे ...विकल मन से
तुम ........
कयों रहती हो अनजान
 तुममे प्रकृति का सौन्दर्य हैं निहित
और मैं हूँ
तुम्हारी हरियाली पर मुग्ध एक इंसान
 मेरी नज़रों की
बुझती नहीं हैं कभी प्यास
 तुम्ही दिवस का
सुनहरा आरम्भ हो -सु प्रभात
 कुंकुम  सी छिड़की हुई
वादियों में तुम्ही हो
दिवस का अवसान
 सितारों से जड़ी ओढ़नी
ओढ़कर
आती हो फिर मुझे लुभाने
बन चांदनी रात
किशोर कुमार खोरेन्द्र 


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