गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

543-do kavitaaye




543-do kavitaaye
by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, October 29, 2012 at 5:52pm ·
 

1-
तेरी आँखों के नूर से
पूनम है पसरा

तेरे अधरों के रंग से
जल मे कमल है उभरा

तेरे तन की खुश्बू से
उपवन है महका

 तेरे मन के पृष्ठ पर
तेरी रूह ने
लिखी है एक गजल उमदा

तेरे मुखडे सा
चाँद है उजला


2-
तेरे प्यार के सागर की
चंचल लहरे
करती है ..मस्ती
तैर रही उस पर
मेरे जीवन की
हिचकोले खाती  कश्ती

तेरी चाहत के अधर 
मंझधार के सूने मे
मुझसे कुछ हैं कहती

झिलमिलाते किरणों सी
फ़ीर तुम्हारी धूप सी
मुस्कुराहटे है हँसती 

तेरी निगाहों के इस
खुबसूरत झील मे
मुझ डगमगाती नैया की
अब क्या है हस्ती

किशोर कुमार 

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