रविवार, 23 दिसंबर 2012

529-" सागर तो बन ही जाओगे "



529-" सागर तो बन ही जाओगे "

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Friday, October 19, 2012 at 9:15am ·
" सागर तो बन ही जाओगे "


लिखते -लिखते
मै
अक्षर
बन गया
मुझे खोजो 
अब ,...
शब्दों मे
तलाशो 
किताबों मे
पन्नो के बीच
कही दबा रह गया हूँ


मुझे किसी ने
जाना नही
मै
नीड़ मे
तिनको सा
रह गया
ट्रेन में 
लोग ऊंघते  ही
रह गये
और मैं ..
छोटे से गाँव के घने अंधेरो सा
गुजर गया


मै अगर
मिल जाऊ ....?
तो
उसे
"बीज -मन्त्र "

समझना
मै तुम्हारे वियोग में
अपनी आँखों से गिरा 
एक  बूंद  आँसू  हूँ 
प्यार हूँ 
मुझे अगर
छू लिये 
तो
सागर तो बन ही जाओगे
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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