शनिवार, 22 दिसंबर 2012

519-"प्राचीन मंदिर मे "



519-"प्राचीन मंदिर मे "

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, October 15, 2012 at 5:58pm ·
"प्राचीन मंदिर मे "
 

धरती के इस
बहुत
प्राचीन
मन्दिर के भीतर

जर्जर हो चुके अंधेरो मे
उतरकर
सीडियाँ
गर्भालय में
उजालो की हो ,कहीं पर
कुछ बुँदे पडी
यह खोजता हूँ मै

श्लोको की अनुगूँज
अमृत सी सहेजी
भरी पडी हो
किसी स्वर्ण -कुम्भ मे
यह खोजता हूँ मै

शुभ आशीर्वादों को
जिसके हाथो ने दिए
उस भगवान के
बिखरे.....
भग्न -अवशेषों मे
प्राण खोजता हूँ मै

लौट कर गए
पद -चिह्नों मे
लोगो की श्रद्धा के
ठहरे हुए
आभार
खोजता हूँ मै


छूते है
मूर्तियों के हाथ
उन हाथो
की उंगलियों मे
सबकी पूजा मे
समर्पित
अटके
अश्रु से भरे नयन
खोजता हूँ मै

वह
देह रहित
अजन्मी
शाश्वत
मगर
इन्तजार मे मेरे
ध्यानस्थ
चहुँ ओर
व्याप्त -बाहुपाश
खोजता हूँ मै

जलते दीपक
की ज्योति की
तप्त -प्रतिछाया
का
चिर -आभास
खोजता हूँ मै

बहुत प्राचीन ,धरती के
इस
मन्दिर के भीतर
जर्जर हो चुके
अंधेरो मे उतर कर सीडिया
गर्भालय मे
उजालो की हो कुछ


बूँदें ...पडी


यह खोजता हूँ मै .
 
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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