शनिवार, 22 दिसंबर 2012

516-याद हो गए



516-याद हो गए

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Sunday, October 14, 2012 at 12:15pm ·
कितने दिन और
कितनी ..रात
व्यतीत  हो गए
भूलने की कोशिश मे
तुम .....
मुझे ,याद हो गए


मै पुरूष आधा
मन मे  बसी रहती
इसलिए -
सदैव एक पवित्र राधा
राधा ,राधा के  सद्रश्य  
 तुम  ..
मन्त्र -जाप ..हो गए

रूप नही ,आकार नही
देह नही ,साकार नही
चेतना मे प्रेम का
हम
एकाकार भावः हो गए

हर आँखों मे
चित्र अनंत समाया
हर मन के पास मगर
प्यार लौट कर
अंत मे एक -जैसा आया
उस सच्चे प्यार को पाकर
लगता है
हम  -तुम भव -सागर पार हो गए 

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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